लेखनी कहानी -04-Jan-2023
बंदिशे हमेशा रहेगी
पर उस मे भी जो एक
लो से उजियारा कर सके
तो उसका जीवन सफल है
पाबंदियो के जाल मे
हम आज भी फंसे है
और लोग कहते है
हम आजाद है
महिलाओं को आज भी
पिंजरे मे रखा जाता है
विचारों को उनके बांधा
जाता है पिंजरे मे वो आज
भी कैद है
पर उसको थोडा फडफडाने दिया जाता है
पंछी को जैसे ये गुमा होता है
वो आजाद है यह उसके मन मे
घर कर लेता है
शाम को पंछी आते वापस
पिंजरे मे हो जाता कैद
उसकी दुनिया है वह तक
बाकी दुनिया से ना लेनदेन
क्यो उसके साथ किया जाता
ऐसा सल्लुक क्या उसके दिल मे
पीडा का ना हो शोर
-स्व लिखित
-अभिलाषा देशपांडे
Sachin dev
05-Jan-2023 04:00 PM
Very good
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Raziya bano
04-Jan-2023 06:48 PM
Nice
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Gunjan Kamal
04-Jan-2023 10:32 AM
शानदार प्रस्तुति 👌
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